धारा 324 IPC क्या है? हथियार से चोट — अब BNS 118, सज़ा और जमानत

धारा 324 हथियार से चोट — अब BNS 118, गैर-जमानती

धारा 324 IPC अब BNS 118(1) है। ख़तरनाक हथियार या साधन से जानबूझकर चोट पहुंचाने पर 3 वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों। यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है, अदालत किसी भी मजिस्ट्रेट की होगी।

धारा एक नज़र में

IPC — पुरानी धारा धारा 324
BNS — अब यही धारा है धारा 118(1)
गैर-जमानती संज्ञेय
अपराध
ख़तरनाक हथियार से जानबूझकर चोट
सुनवाई कहाँ
कोई भी मजिस्ट्रेट
सज़ा
3 वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
आधिकारिक स्रोत https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/20062
यह जानकारी को बेयर एक्ट से मिलाई गई थी

धारा 324 ख़तरनाक हथियार या साधन से जानबूझकर चोट पहुंचाने की धारा है — चाकू, डंडा, लोहे की रॉड, तेज़ाब, आग या ज़हर जैसी चीज़ों से किया गया हमला। नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) में यह अब धारा 118(1) है। सज़ा 3 साल तक + जुर्माना — यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है, यानी 323 से कहीं ज़्यादा गंभीर।

धारा 324 क्या है?

अगर चोट सामान्य मारपीट से नहीं, बल्कि ऐसे साधन से पहुंचाई गई हो जिससे मौत होना संभव है, तो 323 की जगह 324 (BNS 118) लगती है। कानून ऐसे साधनों को "ख़तरनाक हथियार" मानता है।

  • काटने-भोंकने वाले हथियार: चाकू, छुरी, कुल्हाड़ी, तलवार
  • भारी/कुंद हथियार: डंडा, लोहे की रॉड, पत्थर, हॉकी स्टिक
  • आग, गर्म पदार्थ, तेज़ाब या ज़हर से पहुंचाई गई चोट
  • जानवर छोड़ना या विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल

अदालतें यह भी देखती हैं कि हथियार का इस्तेमाल कैसे हुआ — कई बार सामान्य चीज़ (जैसे पत्थर) भी इस्तेमाल के तरीक़े की वजह से "ख़तरनाक" मानी जाती है।

धारा 324 में सज़ा और जमानत

सज़ा: 3 वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों
गैर-जमानती (non-bailable) — जमानत थाने से नहीं, अदालत से मिलती है
संज्ञेय (cognizable) — पुलिस बिना वारंट FIR दर्ज कर गिरफ़्तार कर सकती है
समझौता: अदालत की अनुमति से ही संभव (323 की तरह सीधा नहीं)
सुनवाई मजिस्ट्रेट की अदालत में

323 और 324 में फ़र्क़ — एक नज़र में

धारा 323 (BNS 115(2))धारा 324 (BNS 118(1))
चोट कैसेहाथ-पैर से मारपीटख़तरनाक हथियार/साधन से
सज़ा1 वर्ष / ₹10,0003 वर्ष तक + जुर्माना
जमानतजमानती (अधिकार)गैर-जमानती (अदालत से)
पुलिस कार्रवाईअसंज्ञेय — मजिस्ट्रेट की अनुमति ज़रूरीसंज्ञेय — सीधे FIR और गिरफ़्तारी
समझौतासीधे हो सकता हैअदालत की अनुमति से

धारा 324 IPC अब BNS 118 है

धारा 118 के दो हिस्से — 118(1) साधारण चोट 3 वर्ष, 118(2) गंभीर चोट 10 वर्ष या आजीवन
चोट की गंभीरता से तय होता है हिस्सा

BNS की धारा 118 दो हिस्सों में है — 118(1) ख़तरनाक हथियार से साधारण चोट (पुरानी 324), और 118(2) ख़तरनाक हथियार से गंभीर चोट (पुरानी IPC 326), जिसमें सज़ा 10 वर्ष तक या आजीवन कारावास तक जा सकती है। यानी चोट कितनी गंभीर है, इसी से तय होता है कि 118(1) लगेगी या 118(2)।

324 का केस हो तो क्या करें?

1

पीड़ित हैं तो: तुरंत सरकारी अस्पताल में MLC रिपोर्ट बनवाएं — हथियार से लगी चोट का मेडिकल विवरण ही केस की जान है।

2

FIR में हथियार का ज़िक्र साफ़ लिखवाएं, और घटनास्थल से हथियार/सबूत पुलिस को दिखाएं।

3

आरोपी हैं तो: यह गैर-जमानती है — तुरंत वकील से मिलकर अग्रिम जमानत या नियमित जमानत की अर्ज़ी लगवाएं।

4

आत्मरक्षा (self-defence) का पक्ष हो तो गवाह, चोट की अपनी रिपोर्ट और परिस्थितियों के सबूत संभालकर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

धारा 324 अब कौन-सी धारा है?

BNS की धारा 118(1)। ख़तरनाक हथियार से गंभीर चोट पर 118(2) लगती है (पुरानी IPC 326)।

324 में जमानत मिलती है?

यह गैर-जमानती है, इसलिए जमानत अदालत के विवेक पर मिलती है — चोट की गंभीरता, आरोपी का रिकॉर्ड और परिस्थितियां देखी जाती हैं।

क्या 324 में समझौता हो सकता है?

अदालत की अनुमति से समझौता संभव है — 323 की तरह सीधे नहीं।

"कलम 324" का मतलब क्या है?

मराठी/गुजराती में "कलम" यानी धारा — कलम 324 का मतलब वही धारा 324 है।

डंडे से मारने पर कौन-सी धारा लगती है?

डंडा ख़तरनाक साधन माना जाता है, इसलिए आम तौर पर 324 (BNS 118) लगती है; चोट गंभीर हो तो धारा और सख़्त हो सकती है।

संबंधित धाराएं: धारा 323 — साधारण मारपीट · धारा 307 — हत्या का प्रयास · IPC की अन्य धाराएं

लेखक के बारे में

आकाश भाटी

आपका हक़ के संस्थापक और लेखक। सरकारी योजनाओं, DBT प्रक्रिया और नागरिक सेवाओं पर लिखते हैं। हर लेख आधिकारिक पोर्टल और अधिसूचनाओं से मिलान के बाद ही प्रकाशित होता है, और हर पन्ने पर अंतिम सत्यापन की तारीख़ दर्ज रहती है — जो जानकारी पुष्टि न हो सके, वह प्रकाशित नहीं की जाती।

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