लोक अदालत 2026: अगली तारीख़, टोकन रजिस्ट्रेशन और ट्रैफिक चालान माफी — पूरी जानकारी

लोक अदालत 2026 — ज़िला अदालत परिसर में चालान निपटाने पहुँचे लोग

लोक अदालत अदालत का समझौता दिवस है, जहाँ ट्रैफिक चालान और छोटे मुक़दमे मौके पर कम राशि में हमेशा के लिए निपट जाते हैं। National Lok Adalat आमतौर पर हर तिमाही लगती है — तारीख़ nalsa.gov.in से पुष्टि करें।

लोक अदालत अदालत का "समझौता दिवस" है — छोटे मुक़दमे और ट्रैफिक चालान मौके पर, कम पैसे में, हमेशा के लिए निपट जाते हैं। National Lok Adalat आमतौर पर हर तिमाही (साल में 4 बार) लगती है, फ़ैसला दोनों पक्षों की रज़ामंदी से होता है और उसकी कोई अपील नहीं होती — यानी मामला वहीं खत्म। नीचे अगली तारीख़, टोकन रजिस्ट्रेशन और चालान माफ़ी की पूरी प्रक्रिया है।

अगली लोक अदालत कब है — 2026 की तारीख़ें

National Lok Adalat की तारीख़ें NALSA (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) तय करता है — आमतौर पर मार्च, मई/जून, सितंबर और दिसंबर के दूसरे शनिवार के आसपास। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) अपने-अपने राज्य का कैलेंडर जारी करते हैं।

⚠️ तारीख़ की पुष्टि ज़रूरी है: हर तिमाही की सटीक तारीख़ nalsa.gov.in या अपने राज्य के SLSA/ज़िला अदालत की वेबसाइट से ही मानें — प्रस्तावित तारीख़ें बदलती रहती हैं, और सोशल मीडिया पर पुरानी तारीख़ें वायरल होती रहती हैं। ज़िला अदालतों की साइटों (जैसे district.dcourts.gov.in) पर "Schedule of National Lok Adalats" नोटिस मिलता है।

ट्रैफिक चालान लोक अदालत में कैसे माफ़/कम होता है

यही लोक अदालत का सबसे बड़ा इस्तेमाल है — pending चालान (ख़ासकर कैमरे वाले) लोक अदालत में घटी हुई राशि पर निपटाए जाते हैं:

1

अपने शहर की ट्रैफिक पुलिस साइट पर pending चालान देखें (गाड़ी नंबर से)।

2

लोक अदालत से पहले टोकन/अपॉइंटमेंट लें (तरीका नीचे) — बिना टोकन ज़्यादातर बड़े शहरों में एंट्री नहीं मिलती।

3

तय दिन, तय समय पर बेंच के सामने जाएँ — चालान की सूची दिखेगी।

4

बेंच (जज + सदस्य) राशि घटाकर बताती है — रज़ामंद हों तो वहीं भुगतान करें (UPI/कार्ड/नकद व्यवस्था अदालत के हिसाब से)।

5

रसीद सँभालें — निपटा हुआ चालान दोबारा नहीं खुलता।

लोक अदालत में बेंच के सामने मौके पर निपटते मामले
रज़ामंदी आपकी — बताई राशि माननी ज़रूरी नहीं

कितना कम होता है, यह चालान के प्रकार और बेंच पर निर्भर है — कई मामलों में राशि आधी या उससे भी कम हो जाती है, पर कोई तय गारंटी नहीं होती। (पुष्टि करें)

टोकन रजिस्ट्रेशन — Delhi का तरीका

दिल्ली में टोकन traffic.delhipolice.gov.in पर मिलता है और हर लोक अदालत से कुछ दिन पहले खुलता है:

1

लोक अदालत की घोषणा के बाद Delhi Traffic Police की साइट/नोटिस पर "Online appointment for Lok Adalat" लिंक देखें — टोकन विंडो आमतौर पर अदालत से कुछ दिन पहले, तय समय पर खुलती है।

2

गाड़ी नंबर और माँगी गई जानकारी भरें — आपके pending चालान दिखेंगे।

3

कोर्ट परिसर और स्लॉट चुनें — स्लॉट मिनटों में भर जाते हैं, विंडो खुलते ही कोशिश करें।

4

टोकन/अपॉइंटमेंट स्लिप डाउनलोड/प्रिंट करें — उसी में तारीख़, समय और कोर्ट नंबर लिखा होता है।

टोकन विंडो खुलते ही मोबाइल से pending चालान और स्लॉट की जाँच
स्लॉट मिनटों में भरते हैं — विंडो खुलते ही कोशिश करें
ध्यान रखें: हर लोक अदालत से पहले प्रक्रिया थोड़ी बदल सकती है (कभी चालान की सीमा, कभी सिर्फ़ नोटिस वाले चालान)। उस अदालत का ताज़ा नोटिस ही अंतिम है — पुराने वीडियो के भरोसे न रहें।

UP और बाकी राज्यों में तरीका

  • UP: तारीख़ें uttarpradesh.nalsa.gov.in / ज़िला अदालत की साइट पर आती हैं। ट्रैफिक/छोटे मामलों के लिए ज़्यादातर ज़िलों में सीधे पहुँचकर काउंटर से नंबर मिलता है; कुछ शहरों में ऑनलाइन व्यवस्था है — अपने ज़िले का नोटिस देखें।
  • बाकी राज्य: हर राज्य के SLSA की साइट (जैसे dslsa.org दिल्ली के लिए) पर नोटिस आता है। बैंक/बिजली/BSNL के pre-litigation मामलों के नोटिस डाक से भी आते हैं — उसमें बेंच और समय लिखा होता है।

कौन-से मामले लोक अदालत जा सकते हैं, कौन-से नहीं

जा सकते हैं ✅नहीं जा सकते ❌
ट्रैफिक चालान, छोटे compoundable आपराधिक मामलेगंभीर (non-compoundable) आपराधिक मामले
बैंक वसूली, बिजली-पानी बिल विवादजिनमें समझौता कानूनन मुमकिन नहीं
चेक बाउंस (138 NI Act), मोटर दुर्घटना क्लेम
पारिवारिक/वैवाहिक समझौते, ज़मीन-जायदाद के आपसी विवाद
पहले से चल रहा केस भी दोनों पक्षों की सहमति से लोक अदालत भेजा जा सकता है

Permanent Lok Adalat क्या अलग है?

Permanent Lok Adalat (PLA) स्थायी होती है (तिमाही का इंतज़ार नहीं) और public utility सेवाओं — परिवहन, डाक, बिजली-पानी, अस्पताल सेवा — के विवाद सुनती है। बड़ा फर्क: समझौता न हो तो PLA तय सीमा तक मामले का फ़ैसला भी कर सकती है, जबकि आम लोक अदालत सिर्फ़ रज़ामंदी पर चलती है। (सीमा/दायरा NALSA से पुष्टि करें)

जाने से पहले क्या ले जाएँ + वहाँ होता क्या है

टोकन/अपॉइंटमेंट स्लिप (जहाँ लागू)
चालान/केस के काग़ज़ और नोटिस
गाड़ी की RC और अपना ID
भुगतान का इंतज़ाम (UPI + थोड़ा नकद)

सुबह पहुँचने पर सूची में अपना नाम/चालान देखें, बताई बेंच के बाहर इंतज़ार करें। नंबर आने पर बेंच राशि/शर्त बताती है — हाँ कहना ज़रूरी नहीं है; रज़ामंद न हों तो केस जहाँ था वहीं रहता है, कोई नुकसान नहीं। रज़ामंद हों तो award बनता है, भुगतान होता है, और मामला हमेशा के लिए बंद।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लोक अदालत का फ़ैसला binding होता है?

हाँ — award सिविल कोर्ट की डिक्री जैसा है और उसकी कोई अपील नहीं होती। इसीलिए वह सिर्फ़ आपकी रज़ामंदी से ही बनता है।

वकील ले जाना ज़रूरी है?

नहीं — प्रक्रिया आम आदमी के लिए बनी है। जटिल/बड़े मामले में वकील साथ रख सकते हैं।

चालान कितना कम होता है?

तय नहीं — बेंच चालान का प्रकार देखकर घटाती है; कई बार आधे से भी कम, कभी मामूली छूट। जो राशि बताई जाए, माननी ज़रूरी नहीं।

टोकन नहीं मिला तो?

अगली तिमाही की लोक अदालत का इंतज़ार करें — चालान वहीं रहेगा। बीच में वर्चुअल कोर्ट (vcourts.gov.in) से ऑनलाइन भुगतान का विकल्प भी देख सकते हैं, पर वहाँ छूट नहीं मिलती।

क्या लोक अदालत ऑनलाइन होती है?

टोकन/रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन है; सुनवाई ज़्यादातर जगह अब भी परिसर में होती है। कुछ राज्यों में ई-लोक अदालत के प्रयोग हुए हैं — अपने SLSA का नोटिस देखें।

स्रोत

आधिकारिक: nalsa.gov.in, दिल्ली: dslsa.org और traffic.delhipolice.gov.in। तारीख़ें और टोकन प्रक्रिया हर तिमाही बदलती हैं — जाने से पहले पुष्टि करें। यह लेख सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं।

लेखक के बारे में

आकाश भाटी

आपका हक़ के संस्थापक और लेखक। सरकारी योजनाओं, DBT प्रक्रिया और नागरिक सेवाओं पर लिखते हैं। हर लेख आधिकारिक पोर्टल और अधिसूचनाओं से मिलान के बाद ही प्रकाशित होता है, और हर पन्ने पर अंतिम सत्यापन की तारीख़ दर्ज रहती है — जो जानकारी पुष्टि न हो सके, वह प्रकाशित नहीं की जाती।

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